Monday, January 7, 2019

अनिल अंबानी, अडानी समेत कई कारोबारियों को गहलोत सरकार का झटका, 240 एमओयू होंगे रद्द

निवेश में रुचि नहीं दिखाने पर राजस्थान सरकार रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट के 200 से ज्यादा एमओयू निरस्त करने वाली है. इनमें अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह ओर गौतम अडानी का अडानी ग्रुप जैसी कंपनियों के एमओयू भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे सरकार ने नवंबर 2015 में इनवेस्टर समिट का आयोजन किया था. इसके तहत तत्कालीन सरकार ने 3.37 लाख करोड़ रुपये के 470 एमओयू किए थे.

उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा के अनुसार, इन्वेस्टर मीट के बाद तीन साल में केवल 124 एमओयू ही ऐसे रहे जिन पर काम हुआ. इससे राजस्थान को 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश मिला. लेकिन बड़ी कंपनियों ने काम शुरू तक नहीं किया. इस कारण उन्हें नोटिस दिए जाएंगे. नोटिस के बावजूद यदि काम नहीं शुरू हुआ तो एमओयू रद्द होंगे.

गौरतलब है कि जिन कंपनियों ने एमओयू साइन किए थे उन्हें सरकार जमीन और टैक्स आदि में रियायत देने वाली थी. इनमें पर्यटन, खनन और मेडिकल जैसे क्षेत्र शामिल थे.

ढाई लाख करोड़ रु. से ज्यादा के करीब 240 एमओयू फेल....

बता दें कि रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में 240 एमओयू ऐसे थे जिनमें ढाई लाख करोड़ रु. से ज्यादा का निवेश होने वाला था. इसमें पर्यटन, खनन और मेडिकल जैसे क्षेत्र शामिल थे. लेकिन किसी भी कंपनी ने राजस्थान में रूचि नहीं दिखाई.

जानिए आखिर किस क्षेत्र में कितना हुआ था निवेश...

 रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में टूरिज्म में 10,442 करोड़ के 221 एमओयू हुए थे. जबकि मेडिकल में करीब 2700 करोड़ रु. के 14 एमओयू हुए. लेकिन इनमें कोई भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ. वहीं, माइंस में 76 हजार करोड़ के 25 एमओयू हुए और इसमें निवेश केवल 1500 करोड़ रुपये का आया.

बीजेपी प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने अपने एक बयान से जहां खुद से लिए आलोचना का रास्ता खोल दिया है वहीं पार्टी की जमकर किरकिरी का कारण भी बन गया है. देश के सबसे बड़े न्यूज चैनल आजतक पर राफेल विवाद के चलते हिंदुस्तान एरोनॉटक्स लिमिटेड (एचएएल) पर बहस के दौरान एचएएल में कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए कैश संकट के सवाल पर हुसैन ने दावा किया कि उनकी सरकार कैश में भरोसा नहीं रखती क्योंकि मोदी सरकार कैशलेस इकोनॉमी की बात करती है.

गौरतलब है कि इस मुद्दे पर टीवी बहस के दौरान न्यूज एंकर निशांत चतुर्वेदी ने सवाल किया कि एचएएल के चेयरमैन और सीएमडी ने दावा किया है कि एचएएल कैश-इन-हैंड नकारात्मक है. इसके चलते कंपनी अपने कर्मचारियों को सैलरी देने की स्थिति में नहीं है. इस नकारात्मक कैश-इन-हैंड, जो कि एक अकाउंटिंग का शब्द है और जिसका मतलब है कि कंपनी के पास खाते में कर्मचारी को सैलरी देने के लिए अथवा अपना अन्य जरूरी खर्च करने के लिए पैसे नहीं है.

अपने इस जवाब से जहां शहनवाज हुसैन ने जाहिर कर दिया कि उन्हें कैश-इन-हैंड शब्द का मतलब नहीं पता था और वह इसे कैश मुद्रा और डिजिटल मुद्रा से कन्फ्यूज कर बैठे. हालांकि उनकी इस गलती पर न्यूज एंकर ने उन्हें मजाक न करने के लिए कहा क्योंकि टीवी चैनल पर एक अहम मुद्दे पर बहस की जा रही थी.

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गौरतलब है कि इस टीवी बहस के दौरान शहनवाज हुसैन के साथ कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेरा भी शामिल थे. बीते कुछ दिनों से एचएएल की आर्थिक स्थिति पर लेकर विवाद खड़ा हुआ है. हाल ही में लोकसभा में इस मुद्दे पर हुई बहस में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर संसद और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया था.

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