दिल्ली वालों के लिए नया साल खुशखबरी लेकर आया है, ये खबर आपको जाम से राहत दिलाएगी. दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन का नवनिर्मित मयूर विहार पॉकेट-1 और लाजपत नगर रूट सोमवार से आम लोगों के लिए खुल गया है. इस रूट पर मेट्रो के परिचालन होने पर आनंद विहार के बाद हजरत निजामुद्दीन दिल्ली में परिवहन का दूसरा बड़ा केंद्र बन जाएगा.
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने हरी झंडी दिखाकर सोमवार को इस सेक्शन की शुरुआत की. इस रूट की कुल लंबाई 9.7 KM. है, इसमें 5 मेट्रो स्टेशन हैं. इस रूट के कारण अब यात्री सीधे तौर पर पूर्वी दिल्ली से दक्षिण दिल्ली से जुड़ेंगे. इस रूट के अस्तित्व में आने पर दिल्ली के आश्रम में जाम से राहत मिलेगी.
यहां मेट्रो स्टेशन पर सरायकाले खां अंतर्राज्यीय बस अड्डा और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों दोनों तरफ प्रवेश और निकास द्वार होंगे. दक्षिण भारत को जाने वाली ज्यादातर ट्रेन हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से परिचालित होती हैं. इस रूट पर मौजूद आश्रम स्टेशन.
मेट्रो का यह कॉरिडोर 59 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन मेट्रो रूट का हिस्सा है जो शिव विहार को मजलिस पार्क से जोड़ता है. यह इस साल खुलने वाली तीसरी व अंतिम मेट्रो लाइन है, बाकी दो पर पहले परिचालन शुरू हो गया है. पिंक लाइन के इस कॉरिडोर के लिए मयूर विहार पॉकेट से इंटरचेंज करनी होगी.
आपको बता दें कि नए साल के अवसर पर मेट्रो के समय में काफी बदलाव किया गया है. इस दौरान दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर 31 दिसंबर की रात 9 बजे के बाद निकास बंद हो जाएगा, हालांकि यात्री यहां से मेट्रो पकड़ सकेंगे.
दिल्ली यातायात पुलिस ने नए साल की पूर्व संध्या पर शहर में ट्रैफिक के सुचारू रूप से संचालन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. सबसे ज्यादा तवज्जो कनॉट प्लेस और इसके आसपास के इलाकों पर दी गई है, जहां रात को गाड़ियों के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी. यातायात पुलिस ने जारी एक बयान में कहा कि कनॉट प्लेस में रात आठ बजे से लेकर जश्न खत्म होने तक सभी तरह के वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा. यातायात के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त बी के सिंह ने कहा कि कनॉट प्लेस के इनर, मिडिल या आउटर सर्कल में गाड़ियों को जाने की इजाजत नहीं है.
अधिकारी ने कहा कि यातायात पुलिस शराब पीकर गाड़ी चलाने, सिग्नल तोड़ने और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाएगी. बयान में बताया गया है कि मंडी हाउस गोल चक्कर, बंगाली मार्केट गोल चक्कर, रंजीत सिंह फ्लाईओर, मिंटो रोड, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग क्रॉसिंग, मुंजे चौक (नई दिल्ली रेलवे स्टेशन) के पास चेम्सफोर्ड रोड से वाहनों को कनॉट प्लेस की ओर आने नहीं दिया जाएगा.
बी के सिंह ने बताया कि आरके आश्रम मार्ग-चित्रगुप्त, गोल मार्केट गोल चक्कर, जीपीओ, पटेल चौक, कस्तूरबा गांधी रोड-फिरोजशाह रोड क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-बंगला साहिब लेन की ओर से भी गाड़ियों को कनॉट प्लेस की ओर नहीं बढ़ने दिया जाएगा. यातायात परामर्श के मुताबिक, वाहन चालक कनॉट प्लेस के आसपास कुछ स्थानों पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर सकते हैं.
Monday, December 31, 2018
Sunday, December 16, 2018
हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं थी अकबर और महाराणा प्रताप के बीच
उस भोज का ज़िक्र करते हुए जेम्स टोड अपनी किताब 'एनल्स एंड एंटीक्वीटीज़ ऑफ़ राजस्थान' में लिखते हैं, "मान सिंह ने कहा कि मुझे पेट दर्द का बहाना अच्छी तरह से मालूम है. मैं तब तक एक भी निवाला अपने मुंह में नहीं डालूंगा, जब तक प्रताप खुद मेरे सामने थाली नहीं रखते. तब हम दोनों एक थाली से साथ खाना खाएंगे."
"प्रताप ने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा कि वो ऐसे राजपूत के साथ खाना नहीं खा सकते जिसने अपनी बुआ को शादी में तुर्कों को दे दिया है."
इस मुलाकात का ज़िक्र न तो अबुल फ़ज़ल ने 'अकबरनामा' में और न ही अब्दुल क़ादिर बदायूंनी ने 'मनतख़ब-उत-तारीख़' में किया है.
हाँ, अमरकाव्य वंशावली में राज रत्नाकर ने इस मुलाक़ात का वर्णन करते हुए लिखा है, "जब मान सिंह बीच में ही भोज छोड़ कर उठने लगे तो प्रताप ने उन पर कटाक्ष किया कि उन्हें अपने फूफा अकबर के साथ वहाँ आना चाहिए था."
"मान सिंह के जाने के बाद प्रताप ने उन बर्तनों और थालियों को धुलवाया जिसमें उन्हें खाना परोसा गया था, ताकि उनकी नज़रों में उस पाप को धोया जा सके जो उन्होंने अपनी बुआ को सम्राट को शादी में देकर किया था."
जगमाल को बनाया था अपना वारिस
मान सिंह से पहले उनके पिता भगवंत दास और अकबर के नवरत्नों में से एक राजा टोडरमल भी अकबर की तरफ़ से महाराणा प्रताप को मनाने आ चुके थे, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली थी.
28 फ़रवरी, 1572 को राणा उदय सिंह का देहांत होने से पहले उन्होंने अपने नौवें नंबर के पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी बनाया, हालांकि राणा प्रताप उनके सबसे बड़े पुत्र थे. ये अलग बात है कि मेवाड़ के मंत्रियों और दरबारियों ने अंतत: राणा प्रताप को ही गद्दी पर बैठवाया.
'महाराणा प्रताप- द इनविंसिबिल वारियर' की लेखिका रीमा हूजा बताती हैं, "राणा उदय सिंह ने बीस से अधिक शादियाँ की थीं. राणा प्रताप उनके सबसे बड़े पुत्र थे. उनके 25 भाई और 20 बहनें थीं. जब उदय सिंह का देहांत हुआ तो प्रताप उन्हें मुखाग्नि देने नहीं गए, क्योंकि उस समय तक मेवाड़ में प्रथा थी कि सबसे बड़ा पुत्र पिता के दाह संस्कार के समय राजमहल में ही रहता था, ताकि अगर कोई दुश्मन उस समय हमला कर दे तो वो उससे निपट सके."
"जब प्रताप के मामा अखई राज और ग्वालियर के राम सिंह को जो उस समय मेवाड़ में रह रहे थे, को राजकुमार जगमाल अंत्येष्टि स्थल पर नहीं मिले तो उन्होंने उनके बारे में पूछा. पता चला कि वो राजमहल के अंदर है और वहाँ उनके राज्याभिषेक की तैयारी चल रही है. वो तुरंत राजमहल में गए. वहाँ जगमाल उस गद्दी पर बैठे हुए थे जिस पर महाराणा उदय सिंह बैठा करते थे."
"उन दोनों ने दाहिने और बांए तरफ़ से उनका एक-एक हाथ पकड़ा और ज़बरदस्ती उस स्थान पर बैठा दिया जहाँ महाराणा के पुत्र बैठा करते थे. फिर प्रताप की खोज हुई. वो शहर के बाहर कुछ लोगों के साथ एक बावड़ी पर बैठे हुए थे और राज्य से बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे. उनको राणा बनने के लिए मनाया गया और वहीं पर उन्हें एक पत्थर पर बैठा कर उनका राज्याभिषेक किया गया."
"प्रताप ने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा कि वो ऐसे राजपूत के साथ खाना नहीं खा सकते जिसने अपनी बुआ को शादी में तुर्कों को दे दिया है."
इस मुलाकात का ज़िक्र न तो अबुल फ़ज़ल ने 'अकबरनामा' में और न ही अब्दुल क़ादिर बदायूंनी ने 'मनतख़ब-उत-तारीख़' में किया है.
हाँ, अमरकाव्य वंशावली में राज रत्नाकर ने इस मुलाक़ात का वर्णन करते हुए लिखा है, "जब मान सिंह बीच में ही भोज छोड़ कर उठने लगे तो प्रताप ने उन पर कटाक्ष किया कि उन्हें अपने फूफा अकबर के साथ वहाँ आना चाहिए था."
"मान सिंह के जाने के बाद प्रताप ने उन बर्तनों और थालियों को धुलवाया जिसमें उन्हें खाना परोसा गया था, ताकि उनकी नज़रों में उस पाप को धोया जा सके जो उन्होंने अपनी बुआ को सम्राट को शादी में देकर किया था."
जगमाल को बनाया था अपना वारिस
मान सिंह से पहले उनके पिता भगवंत दास और अकबर के नवरत्नों में से एक राजा टोडरमल भी अकबर की तरफ़ से महाराणा प्रताप को मनाने आ चुके थे, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली थी.
28 फ़रवरी, 1572 को राणा उदय सिंह का देहांत होने से पहले उन्होंने अपने नौवें नंबर के पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी बनाया, हालांकि राणा प्रताप उनके सबसे बड़े पुत्र थे. ये अलग बात है कि मेवाड़ के मंत्रियों और दरबारियों ने अंतत: राणा प्रताप को ही गद्दी पर बैठवाया.
'महाराणा प्रताप- द इनविंसिबिल वारियर' की लेखिका रीमा हूजा बताती हैं, "राणा उदय सिंह ने बीस से अधिक शादियाँ की थीं. राणा प्रताप उनके सबसे बड़े पुत्र थे. उनके 25 भाई और 20 बहनें थीं. जब उदय सिंह का देहांत हुआ तो प्रताप उन्हें मुखाग्नि देने नहीं गए, क्योंकि उस समय तक मेवाड़ में प्रथा थी कि सबसे बड़ा पुत्र पिता के दाह संस्कार के समय राजमहल में ही रहता था, ताकि अगर कोई दुश्मन उस समय हमला कर दे तो वो उससे निपट सके."
"जब प्रताप के मामा अखई राज और ग्वालियर के राम सिंह को जो उस समय मेवाड़ में रह रहे थे, को राजकुमार जगमाल अंत्येष्टि स्थल पर नहीं मिले तो उन्होंने उनके बारे में पूछा. पता चला कि वो राजमहल के अंदर है और वहाँ उनके राज्याभिषेक की तैयारी चल रही है. वो तुरंत राजमहल में गए. वहाँ जगमाल उस गद्दी पर बैठे हुए थे जिस पर महाराणा उदय सिंह बैठा करते थे."
"उन दोनों ने दाहिने और बांए तरफ़ से उनका एक-एक हाथ पकड़ा और ज़बरदस्ती उस स्थान पर बैठा दिया जहाँ महाराणा के पुत्र बैठा करते थे. फिर प्रताप की खोज हुई. वो शहर के बाहर कुछ लोगों के साथ एक बावड़ी पर बैठे हुए थे और राज्य से बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे. उनको राणा बनने के लिए मनाया गया और वहीं पर उन्हें एक पत्थर पर बैठा कर उनका राज्याभिषेक किया गया."
Thursday, December 13, 2018
ईशा अंबानी की हुई शादी, मुंह ढंककर पहुंचे दूल्हे आनंद पीरामल
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की बेटी ईशा की बुधवार को आनंद पीरामल से शादी हुई। दूल्हे आनंद रिवाज के मुताबिक मुंह ढंककर आए। वहीं, बारातियों का स्वागत करने के लिए ईशा के भाई अनंत अंबानी घोड़ी पर बैठे नजर आए। आनंद, पीरामल इंडस्ट्री के मालिक अजय पीरामल के बेटे हैं। ईशा और आनंद को आशीर्वाद देने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, अभिनेता अमिताभ बच्चन, रजनीकांत और आमिर खान समेत कई हस्तियां पहुंचीं। 14 दिसंबर को मुंबई के जियो गार्डन में ही रिसेप्शन होगा। इसमें ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान परफॉर्म करेंगे।
ईशा के भाई अनंत ने घोड़ी पर चढ़कर आनंद पीरामल और उनके परिवार का स्वागत किया।
स्वागत के दौरान मुकेश अंबानी, बेटे आकाश अंबानी और उनकी मंगेतर श्लोका मेहता और मुकेश के भाई अनिल अंबानी मौजूद थे।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एंटीलिया पहुंचे। उन्हें अनिल अंबानी ने रिसीव किया।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, एनसीपी चीफ शरद पवार, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी पहुंचीं।
अमिताभ बच्चन पत्नी जया बच्चन, बेटी श्वेता नंदा और नातिन नव्या नवेली के साथ पहुंचे। ऐश्वर्या, आराध्या और अभिषेक बच्चन बाद में आए।
बिग बी ने क्रीम एम्ब्रॉइडरी का कुर्ता और जया ने क्रीम कलर की साड़ी पहनी। वहीं श्वेता पिंक कलर की साड़ी और उनकी बेटी नव्या गोल्डन साड़ी और मजेंटा कलर के एम्ब्रॉइडरी ब्लाउज में दिखीं।
चारों के लुक की खास बात ये रही कि सभी ने हैवी नैकलेस पहने। जया, श्वेता और नव्या ने व्हाइट स्टोन के नैकलेस पहने। वहीं, बिग बी ने रूबी का हार पहना।
अभिनेता रजनीकांत, उनकी पत्नी ललिता, आमिर खान, उनकी पत्नी किरण राव, करन जौहर, आलिया भट्ट, गौरी खान, फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा, गीतकार प्रसून जोशी भी पहुंचे।
प्रियंका चोपड़ा पति निक जोनस और सचिन तेंडुलकर पत्नी अंजलि के साथ पहुंचे। फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा, अनुपमा चोपड़ा, करिश्मा कपूर और करीना कपूर भी आए।
27 मंजिल एंटीलिया के ग्राउंड फ्लोर पर मंडप तैयार किया गया था। मेन गेट को लाल रंग के गुलाब के फूलों से सजाया गया था। इस पर गोल्डन कलर की रैपिंग गई।
रिलायंस और पीरामल ग्रुप में अहम पदों पर हैं ईशा और आनंद
ईशा अंबानी (27) मुकेश और नीता अंबानी की बेटी हैं। वे रिलायंस जियो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। ईशा रिलायंस रिटेल वेंचर संभालती हैं। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। उनकी शादी आनंद पीरामल (33) से हो रही है।
आनंद का परिवार देश की बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी पीरामल ग्रुप चलाता है। आनंद, पीरामल रियलिटी के फाउंडर और ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। आनंद ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की है। साथ ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ली है। दोनों की सगाई इस साल सितंबर में इटली के लेक कोमो में हुई थी।
उदयपुर में हुई थी प्री-वेडिंग सेरेमनी
इससे पहले, उदयपुर में ईशा अंबानी की प्री-वेडिंग सेरेमनी हुई थी। इसमें दुनियाभर से कई बॉलीवुड सेलेब्स और उद्योगपतियों समेत करीब 1500 मेहमानों ने हिस्सा लिया था। 7 दिसंबर को अंबानी परिवार ने दिव्यांगों और बच्चों को खाना खिलाया था। 8 दिसंबर को दूसरे दिन महाआरती हुई थी।
श्रीनाथजी की 35 फीट ऊंची मूर्ति के सामने नीता अंबानी ने मधुराष्टक पर नृत्य किया था। इसी दिन संगीत सेरेमनी हुई थी। 9 दिसंबर को आर्ट एंड क्राफ्ट चैरिटी कार्निवल लगाया गया था। शाम को हॉलीवुड सिंगर बियोंसे नोल्स ने प्रस्तुति दी थी।
तोहफे में मिला 452 करोड़ रुपए का बंगला
आनंद और ईशा शादी के बाद 452.5 करोड़ रुपए के ओल्ड गुलीटा बंगले में रहेंगे। आनंद के माता-पिता अजय और स्वाति पीरामल ने यह बंगला बेटे और होने वाली बहू को तोहफे में दिया है। वर्ली स्थित यह पांच मंजिला बंगला 50 हजार स्क्वायर फीट में फैला है।
ईशा के भाई अनंत ने घोड़ी पर चढ़कर आनंद पीरामल और उनके परिवार का स्वागत किया।
स्वागत के दौरान मुकेश अंबानी, बेटे आकाश अंबानी और उनकी मंगेतर श्लोका मेहता और मुकेश के भाई अनिल अंबानी मौजूद थे।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एंटीलिया पहुंचे। उन्हें अनिल अंबानी ने रिसीव किया।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, एनसीपी चीफ शरद पवार, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी पहुंचीं।
अमिताभ बच्चन पत्नी जया बच्चन, बेटी श्वेता नंदा और नातिन नव्या नवेली के साथ पहुंचे। ऐश्वर्या, आराध्या और अभिषेक बच्चन बाद में आए।
बिग बी ने क्रीम एम्ब्रॉइडरी का कुर्ता और जया ने क्रीम कलर की साड़ी पहनी। वहीं श्वेता पिंक कलर की साड़ी और उनकी बेटी नव्या गोल्डन साड़ी और मजेंटा कलर के एम्ब्रॉइडरी ब्लाउज में दिखीं।
चारों के लुक की खास बात ये रही कि सभी ने हैवी नैकलेस पहने। जया, श्वेता और नव्या ने व्हाइट स्टोन के नैकलेस पहने। वहीं, बिग बी ने रूबी का हार पहना।
अभिनेता रजनीकांत, उनकी पत्नी ललिता, आमिर खान, उनकी पत्नी किरण राव, करन जौहर, आलिया भट्ट, गौरी खान, फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा, गीतकार प्रसून जोशी भी पहुंचे।
प्रियंका चोपड़ा पति निक जोनस और सचिन तेंडुलकर पत्नी अंजलि के साथ पहुंचे। फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा, अनुपमा चोपड़ा, करिश्मा कपूर और करीना कपूर भी आए।
27 मंजिल एंटीलिया के ग्राउंड फ्लोर पर मंडप तैयार किया गया था। मेन गेट को लाल रंग के गुलाब के फूलों से सजाया गया था। इस पर गोल्डन कलर की रैपिंग गई।
रिलायंस और पीरामल ग्रुप में अहम पदों पर हैं ईशा और आनंद
ईशा अंबानी (27) मुकेश और नीता अंबानी की बेटी हैं। वे रिलायंस जियो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। ईशा रिलायंस रिटेल वेंचर संभालती हैं। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। उनकी शादी आनंद पीरामल (33) से हो रही है।
आनंद का परिवार देश की बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी पीरामल ग्रुप चलाता है। आनंद, पीरामल रियलिटी के फाउंडर और ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। आनंद ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की है। साथ ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ली है। दोनों की सगाई इस साल सितंबर में इटली के लेक कोमो में हुई थी।
उदयपुर में हुई थी प्री-वेडिंग सेरेमनी
इससे पहले, उदयपुर में ईशा अंबानी की प्री-वेडिंग सेरेमनी हुई थी। इसमें दुनियाभर से कई बॉलीवुड सेलेब्स और उद्योगपतियों समेत करीब 1500 मेहमानों ने हिस्सा लिया था। 7 दिसंबर को अंबानी परिवार ने दिव्यांगों और बच्चों को खाना खिलाया था। 8 दिसंबर को दूसरे दिन महाआरती हुई थी।
श्रीनाथजी की 35 फीट ऊंची मूर्ति के सामने नीता अंबानी ने मधुराष्टक पर नृत्य किया था। इसी दिन संगीत सेरेमनी हुई थी। 9 दिसंबर को आर्ट एंड क्राफ्ट चैरिटी कार्निवल लगाया गया था। शाम को हॉलीवुड सिंगर बियोंसे नोल्स ने प्रस्तुति दी थी।
तोहफे में मिला 452 करोड़ रुपए का बंगला
आनंद और ईशा शादी के बाद 452.5 करोड़ रुपए के ओल्ड गुलीटा बंगले में रहेंगे। आनंद के माता-पिता अजय और स्वाति पीरामल ने यह बंगला बेटे और होने वाली बहू को तोहफे में दिया है। वर्ली स्थित यह पांच मंजिला बंगला 50 हजार स्क्वायर फीट में फैला है।
Tuesday, November 20, 2018
कांग्रेस ने आयोग से ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायत की
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 72 सीटों के लिए मंगलवार को वोटिंग जारी है। 2:55 बजे तक 45.2% वोटिंग हुई।रायपुर, रायपुर ग्रामीण, कवर्धा, जांजगीर चांपा, दुर्ग और बालोद समेत कई विधानसभा क्षेत्रों के 50 से ज्यादा मतदान केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। उधर, कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के नेतृत्व में एक टीम ने दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और दुरुपयोग की शिकायत की
पुनिया ने कहा, "छत्तीसगढ़ में ईवीएम मशीनें किसी के घर से मिलती है। भाजपा के प्रत्याशी जगह-जगह पैसे बांटते हुए पकड़े गए। दो लाख भी बरामद हुए। एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन, गिरफ्तारी नहीं। चुनाव आयोग से निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने की मांग की है।"
ईवीएम में गड़बड़ी के चलते सक्ती से भाजपा प्रत्याशी मेघराम साहू एक घंटे तक मतदान के लिए लाइन में खड़े रहे। दूसरे चरण में कुल 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 9 मंत्री और मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनने के कांग्रेस के तीन दावेदारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। दूसरे चरण में शाम पांच बजे तक मतदान जारी रहेगा। पहले चरण की 18 सीटों पर 12 नवंबर को 76.28 फीसदी वोटिंग हुई थी। जो पिछली बार इन सीटों पर हुए 75.93 प्रतिशत मतदान से करीब 0.35 फीसदी ज्यादा है। राज्य की 90 सीटों के परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
रायपुर दक्षिण के दो बूथ 126 और 129 में ईवीएम खराब होने से मतदान करीब आधे घंटे तक रुका।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ सुब्रत साहू ने अपने परिवार के साथ रायपुर में वोट डाला।
कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए ओपी चौधरी ने खरसिया विधानसभा सीट से मतदान किया।
रायगढ़ सीट पर राजीव नगर में वोटिंग मशीन में गड़बड़ी की शिकायत। मतदान में हुई देरी।
रायपुर के सड्डू शासकीय पूर्व माध्यिका शाला में बनाए गए बूथ में ईवीएम खराब होने के कारण 9:50 बजे तक वोटिंग शुरू नहीं हो सकी। यह महिला बूथ है। महिलाएं बिना वोट दिए ही वापस लौट रही हैं। इस कारण से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी ने पेंड्रा के मतदान केंद्र पर वोट डाला।
बेमेतरा विधानसभा में फरी गांव के मतदान केंद्र में ईवीएम पर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर सभी का बटन दबने की शिकायत ग्रामीणों ने की। इसके चलते आधे घंटे बाधित रहा मतदान। बाद में ईवीएम को दुरुस्त किया गया।
रायपुर ग्रामीण में 21, कोरिया के चरचा में 17, भाटापारा में 8 ईवीएम खराब। इस कारण कई बूथों पर मतदाता बिना वोट डाले घर लौट रहे हैं।
भाजपा के पक्ष में वोट कराने के आरोप में मरवाही विधानसभा के एक बूथ पर पोलिंग अफसर कमल तिवारी गिरफ्तार। पीठासीन अधिकारी सुरेंद्र सिंह पर भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गड़बड़ी के आरोप लगाए।
कोरबा के कलेक्टर कैसर अब्दुल हक की पत्नी हिना हक ने मतदान के दौरान निर्वाचन आयोग की नियमावली का उल्लंघन किया। वह मोबाइल फोन लेकर पोलिंग बूथ पहुंचीं। नियमावली में तीन माह की सजा का है प्रावधान।
पार्टी विशेष के पक्ष में वोट डालवाने के आरोप में रायपुर में दो पीठासीन अधिकारी और दो टीआई को हटाए गए।
छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव आयुक्त सुब्रत साहू ने कहा है कि मतदाता ईवीएम खराब होने की सूचना पर ध्यान न दें। ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए पहुंचे। ईवीएम पर्याप्त संख्या में है।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कवर्धा स्थित एक बूथ में परिवार के साथ मतदान किया। वोट डालने के बाद सेल्फी भी ली।
पुनिया ने कहा, "छत्तीसगढ़ में ईवीएम मशीनें किसी के घर से मिलती है। भाजपा के प्रत्याशी जगह-जगह पैसे बांटते हुए पकड़े गए। दो लाख भी बरामद हुए। एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन, गिरफ्तारी नहीं। चुनाव आयोग से निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने की मांग की है।"
ईवीएम में गड़बड़ी के चलते सक्ती से भाजपा प्रत्याशी मेघराम साहू एक घंटे तक मतदान के लिए लाइन में खड़े रहे। दूसरे चरण में कुल 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 9 मंत्री और मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनने के कांग्रेस के तीन दावेदारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। दूसरे चरण में शाम पांच बजे तक मतदान जारी रहेगा। पहले चरण की 18 सीटों पर 12 नवंबर को 76.28 फीसदी वोटिंग हुई थी। जो पिछली बार इन सीटों पर हुए 75.93 प्रतिशत मतदान से करीब 0.35 फीसदी ज्यादा है। राज्य की 90 सीटों के परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
रायपुर दक्षिण के दो बूथ 126 और 129 में ईवीएम खराब होने से मतदान करीब आधे घंटे तक रुका।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ सुब्रत साहू ने अपने परिवार के साथ रायपुर में वोट डाला।
कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए ओपी चौधरी ने खरसिया विधानसभा सीट से मतदान किया।
रायगढ़ सीट पर राजीव नगर में वोटिंग मशीन में गड़बड़ी की शिकायत। मतदान में हुई देरी।
रायपुर के सड्डू शासकीय पूर्व माध्यिका शाला में बनाए गए बूथ में ईवीएम खराब होने के कारण 9:50 बजे तक वोटिंग शुरू नहीं हो सकी। यह महिला बूथ है। महिलाएं बिना वोट दिए ही वापस लौट रही हैं। इस कारण से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी ने पेंड्रा के मतदान केंद्र पर वोट डाला।
बेमेतरा विधानसभा में फरी गांव के मतदान केंद्र में ईवीएम पर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर सभी का बटन दबने की शिकायत ग्रामीणों ने की। इसके चलते आधे घंटे बाधित रहा मतदान। बाद में ईवीएम को दुरुस्त किया गया।
रायपुर ग्रामीण में 21, कोरिया के चरचा में 17, भाटापारा में 8 ईवीएम खराब। इस कारण कई बूथों पर मतदाता बिना वोट डाले घर लौट रहे हैं।
भाजपा के पक्ष में वोट कराने के आरोप में मरवाही विधानसभा के एक बूथ पर पोलिंग अफसर कमल तिवारी गिरफ्तार। पीठासीन अधिकारी सुरेंद्र सिंह पर भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गड़बड़ी के आरोप लगाए।
कोरबा के कलेक्टर कैसर अब्दुल हक की पत्नी हिना हक ने मतदान के दौरान निर्वाचन आयोग की नियमावली का उल्लंघन किया। वह मोबाइल फोन लेकर पोलिंग बूथ पहुंचीं। नियमावली में तीन माह की सजा का है प्रावधान।
पार्टी विशेष के पक्ष में वोट डालवाने के आरोप में रायपुर में दो पीठासीन अधिकारी और दो टीआई को हटाए गए।
छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव आयुक्त सुब्रत साहू ने कहा है कि मतदाता ईवीएम खराब होने की सूचना पर ध्यान न दें। ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए पहुंचे। ईवीएम पर्याप्त संख्या में है।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कवर्धा स्थित एक बूथ में परिवार के साथ मतदान किया। वोट डालने के बाद सेल्फी भी ली।
Sunday, November 11, 2018
क्या कांग्रेस वाकई नक्सलियों का समर्थन करती है
ये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के हालिया भाषण का एक हिस्सा है.
उन्होंने शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर माओवादियों से मिले होने की बात कही.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी 'माओवादियों के शहरी नेटवर्क' से मिली हुई है.
एक दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी रायपुर में पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए उन्हीं आरोपों को दोहराया.
इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर 'वाक युद्ध' छिड़ गया और दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी की गई.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से पूछा "क्या आप अब भी उस बयान पर क़ायम हैं जब आपने नक्सलियों को 'अपने लोग' कहा था? क्या उस बयान पर भी क़ायम हैं जब मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों को धरती पुत्र कह कर संबोधित किया था. क्या आपको मालूम है कि नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के 25 बड़े नेताओं की हत्या कर दी?"
सुरजेवाला का कहना था कि मोदी ने ये बयान 20 मई, 2010 में तब दिया था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
वहीं, रमन सिंह ने ये बयान साल 2015 में दिया था. वो भी ये कहते हुए कि 'नक्सली धरती माता के सपूत हैं' और उनका मुख्यधारा में 'बच्चों की तरह' स्वागत होगा.
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुक़सान उनकी ही पार्टी और उनके ही नेताओं को उठाना पड़ा है.
कांग्रेस पर हमलावर नक्सली
साल 2013 में सुकमा ज़िले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के क़ाफ़िले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.
इसके अलावा भी कांग्रेस को लेकर माओवादियों द्वारा समय-समय पर जो बयान जारी किये जाते रहे हैं उनमें सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा जाता रहा है.
माओवादी कांग्रेस को भाजपा से भी बड़ा दुश्मन इसलिए मानते आये हैं क्योंकि वो पी. चिदंबरम ही थे जिन्होंने गृहमंत्री रहते हुए सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान 'आपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया था.
माओवादी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान से भी ख़फ़ा बताए जाते हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि "माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."
इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों को तैनात किया गया था. इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर कई फ़र्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे. नतीजा, चिदंबरम और सोनिया गाँधी के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम माओवादियों की 'हिट-लिस्ट' में शामिल हो गए.
इतना ही नहीं, माओवादियों ने पर्चे जारी करके खुलेआम कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासी बहुल इलाकों में खनिज संपदाओं की लूट मचा रखी है.
उन्होंने शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर माओवादियों से मिले होने की बात कही.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी 'माओवादियों के शहरी नेटवर्क' से मिली हुई है.
एक दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी रायपुर में पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए उन्हीं आरोपों को दोहराया.
इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर 'वाक युद्ध' छिड़ गया और दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी की गई.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से पूछा "क्या आप अब भी उस बयान पर क़ायम हैं जब आपने नक्सलियों को 'अपने लोग' कहा था? क्या उस बयान पर भी क़ायम हैं जब मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों को धरती पुत्र कह कर संबोधित किया था. क्या आपको मालूम है कि नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के 25 बड़े नेताओं की हत्या कर दी?"
सुरजेवाला का कहना था कि मोदी ने ये बयान 20 मई, 2010 में तब दिया था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
वहीं, रमन सिंह ने ये बयान साल 2015 में दिया था. वो भी ये कहते हुए कि 'नक्सली धरती माता के सपूत हैं' और उनका मुख्यधारा में 'बच्चों की तरह' स्वागत होगा.
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुक़सान उनकी ही पार्टी और उनके ही नेताओं को उठाना पड़ा है.
कांग्रेस पर हमलावर नक्सली
साल 2013 में सुकमा ज़िले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के क़ाफ़िले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.
इसके अलावा भी कांग्रेस को लेकर माओवादियों द्वारा समय-समय पर जो बयान जारी किये जाते रहे हैं उनमें सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा जाता रहा है.
माओवादी कांग्रेस को भाजपा से भी बड़ा दुश्मन इसलिए मानते आये हैं क्योंकि वो पी. चिदंबरम ही थे जिन्होंने गृहमंत्री रहते हुए सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान 'आपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया था.
माओवादी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान से भी ख़फ़ा बताए जाते हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि "माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."
इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों को तैनात किया गया था. इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर कई फ़र्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे. नतीजा, चिदंबरम और सोनिया गाँधी के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम माओवादियों की 'हिट-लिस्ट' में शामिल हो गए.
इतना ही नहीं, माओवादियों ने पर्चे जारी करके खुलेआम कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासी बहुल इलाकों में खनिज संपदाओं की लूट मचा रखी है.
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