ये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के हालिया भाषण का एक हिस्सा है.
उन्होंने शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर माओवादियों से मिले होने की बात कही.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी 'माओवादियों के शहरी नेटवर्क' से मिली हुई है.
एक दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी रायपुर में पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए उन्हीं आरोपों को दोहराया.
इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर 'वाक युद्ध' छिड़ गया और दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी की गई.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से पूछा "क्या आप अब भी उस बयान पर क़ायम हैं जब आपने नक्सलियों को 'अपने लोग' कहा था? क्या उस बयान पर भी क़ायम हैं जब मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों को धरती पुत्र कह कर संबोधित किया था. क्या आपको मालूम है कि नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के 25 बड़े नेताओं की हत्या कर दी?"
सुरजेवाला का कहना था कि मोदी ने ये बयान 20 मई, 2010 में तब दिया था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
वहीं, रमन सिंह ने ये बयान साल 2015 में दिया था. वो भी ये कहते हुए कि 'नक्सली धरती माता के सपूत हैं' और उनका मुख्यधारा में 'बच्चों की तरह' स्वागत होगा.
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुक़सान उनकी ही पार्टी और उनके ही नेताओं को उठाना पड़ा है.
कांग्रेस पर हमलावर नक्सली
साल 2013 में सुकमा ज़िले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के क़ाफ़िले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.
इसके अलावा भी कांग्रेस को लेकर माओवादियों द्वारा समय-समय पर जो बयान जारी किये जाते रहे हैं उनमें सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा जाता रहा है.
माओवादी कांग्रेस को भाजपा से भी बड़ा दुश्मन इसलिए मानते आये हैं क्योंकि वो पी. चिदंबरम ही थे जिन्होंने गृहमंत्री रहते हुए सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान 'आपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया था.
माओवादी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान से भी ख़फ़ा बताए जाते हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि "माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."
इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों को तैनात किया गया था. इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर कई फ़र्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे. नतीजा, चिदंबरम और सोनिया गाँधी के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम माओवादियों की 'हिट-लिस्ट' में शामिल हो गए.
इतना ही नहीं, माओवादियों ने पर्चे जारी करके खुलेआम कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासी बहुल इलाकों में खनिज संपदाओं की लूट मचा रखी है.
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