छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 72 सीटों के लिए मंगलवार को वोटिंग जारी है। 2:55 बजे तक 45.2% वोटिंग हुई।रायपुर, रायपुर ग्रामीण, कवर्धा, जांजगीर चांपा, दुर्ग और बालोद समेत कई विधानसभा क्षेत्रों के 50 से ज्यादा मतदान केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। उधर, कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के नेतृत्व में एक टीम ने दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और दुरुपयोग की शिकायत की
पुनिया ने कहा, "छत्तीसगढ़ में ईवीएम मशीनें किसी के घर से मिलती है। भाजपा के प्रत्याशी जगह-जगह पैसे बांटते हुए पकड़े गए। दो लाख भी बरामद हुए। एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन, गिरफ्तारी नहीं। चुनाव आयोग से निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने की मांग की है।"
ईवीएम में गड़बड़ी के चलते सक्ती से भाजपा प्रत्याशी मेघराम साहू एक घंटे तक मतदान के लिए लाइन में खड़े रहे। दूसरे चरण में कुल 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 9 मंत्री और मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनने के कांग्रेस के तीन दावेदारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। दूसरे चरण में शाम पांच बजे तक मतदान जारी रहेगा। पहले चरण की 18 सीटों पर 12 नवंबर को 76.28 फीसदी वोटिंग हुई थी। जो पिछली बार इन सीटों पर हुए 75.93 प्रतिशत मतदान से करीब 0.35 फीसदी ज्यादा है। राज्य की 90 सीटों के परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
रायपुर दक्षिण के दो बूथ 126 और 129 में ईवीएम खराब होने से मतदान करीब आधे घंटे तक रुका।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ सुब्रत साहू ने अपने परिवार के साथ रायपुर में वोट डाला।
कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए ओपी चौधरी ने खरसिया विधानसभा सीट से मतदान किया।
रायगढ़ सीट पर राजीव नगर में वोटिंग मशीन में गड़बड़ी की शिकायत। मतदान में हुई देरी।
रायपुर के सड्डू शासकीय पूर्व माध्यिका शाला में बनाए गए बूथ में ईवीएम खराब होने के कारण 9:50 बजे तक वोटिंग शुरू नहीं हो सकी। यह महिला बूथ है। महिलाएं बिना वोट दिए ही वापस लौट रही हैं। इस कारण से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी ने पेंड्रा के मतदान केंद्र पर वोट डाला।
बेमेतरा विधानसभा में फरी गांव के मतदान केंद्र में ईवीएम पर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर सभी का बटन दबने की शिकायत ग्रामीणों ने की। इसके चलते आधे घंटे बाधित रहा मतदान। बाद में ईवीएम को दुरुस्त किया गया।
रायपुर ग्रामीण में 21, कोरिया के चरचा में 17, भाटापारा में 8 ईवीएम खराब। इस कारण कई बूथों पर मतदाता बिना वोट डाले घर लौट रहे हैं।
भाजपा के पक्ष में वोट कराने के आरोप में मरवाही विधानसभा के एक बूथ पर पोलिंग अफसर कमल तिवारी गिरफ्तार। पीठासीन अधिकारी सुरेंद्र सिंह पर भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गड़बड़ी के आरोप लगाए।
कोरबा के कलेक्टर कैसर अब्दुल हक की पत्नी हिना हक ने मतदान के दौरान निर्वाचन आयोग की नियमावली का उल्लंघन किया। वह मोबाइल फोन लेकर पोलिंग बूथ पहुंचीं। नियमावली में तीन माह की सजा का है प्रावधान।
पार्टी विशेष के पक्ष में वोट डालवाने के आरोप में रायपुर में दो पीठासीन अधिकारी और दो टीआई को हटाए गए।
छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव आयुक्त सुब्रत साहू ने कहा है कि मतदाता ईवीएम खराब होने की सूचना पर ध्यान न दें। ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए पहुंचे। ईवीएम पर्याप्त संख्या में है।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कवर्धा स्थित एक बूथ में परिवार के साथ मतदान किया। वोट डालने के बाद सेल्फी भी ली।
Tuesday, November 20, 2018
Sunday, November 11, 2018
क्या कांग्रेस वाकई नक्सलियों का समर्थन करती है
ये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के हालिया भाषण का एक हिस्सा है.
उन्होंने शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर माओवादियों से मिले होने की बात कही.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी 'माओवादियों के शहरी नेटवर्क' से मिली हुई है.
एक दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी रायपुर में पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए उन्हीं आरोपों को दोहराया.
इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर 'वाक युद्ध' छिड़ गया और दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी की गई.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से पूछा "क्या आप अब भी उस बयान पर क़ायम हैं जब आपने नक्सलियों को 'अपने लोग' कहा था? क्या उस बयान पर भी क़ायम हैं जब मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों को धरती पुत्र कह कर संबोधित किया था. क्या आपको मालूम है कि नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के 25 बड़े नेताओं की हत्या कर दी?"
सुरजेवाला का कहना था कि मोदी ने ये बयान 20 मई, 2010 में तब दिया था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
वहीं, रमन सिंह ने ये बयान साल 2015 में दिया था. वो भी ये कहते हुए कि 'नक्सली धरती माता के सपूत हैं' और उनका मुख्यधारा में 'बच्चों की तरह' स्वागत होगा.
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुक़सान उनकी ही पार्टी और उनके ही नेताओं को उठाना पड़ा है.
कांग्रेस पर हमलावर नक्सली
साल 2013 में सुकमा ज़िले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के क़ाफ़िले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.
इसके अलावा भी कांग्रेस को लेकर माओवादियों द्वारा समय-समय पर जो बयान जारी किये जाते रहे हैं उनमें सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा जाता रहा है.
माओवादी कांग्रेस को भाजपा से भी बड़ा दुश्मन इसलिए मानते आये हैं क्योंकि वो पी. चिदंबरम ही थे जिन्होंने गृहमंत्री रहते हुए सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान 'आपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया था.
माओवादी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान से भी ख़फ़ा बताए जाते हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि "माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."
इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों को तैनात किया गया था. इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर कई फ़र्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे. नतीजा, चिदंबरम और सोनिया गाँधी के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम माओवादियों की 'हिट-लिस्ट' में शामिल हो गए.
इतना ही नहीं, माओवादियों ने पर्चे जारी करके खुलेआम कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासी बहुल इलाकों में खनिज संपदाओं की लूट मचा रखी है.
उन्होंने शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर माओवादियों से मिले होने की बात कही.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी 'माओवादियों के शहरी नेटवर्क' से मिली हुई है.
एक दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी रायपुर में पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए उन्हीं आरोपों को दोहराया.
इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर 'वाक युद्ध' छिड़ गया और दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी की गई.
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी से पूछा "क्या आप अब भी उस बयान पर क़ायम हैं जब आपने नक्सलियों को 'अपने लोग' कहा था? क्या उस बयान पर भी क़ायम हैं जब मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों को धरती पुत्र कह कर संबोधित किया था. क्या आपको मालूम है कि नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के 25 बड़े नेताओं की हत्या कर दी?"
सुरजेवाला का कहना था कि मोदी ने ये बयान 20 मई, 2010 में तब दिया था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
वहीं, रमन सिंह ने ये बयान साल 2015 में दिया था. वो भी ये कहते हुए कि 'नक्सली धरती माता के सपूत हैं' और उनका मुख्यधारा में 'बच्चों की तरह' स्वागत होगा.
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुक़सान उनकी ही पार्टी और उनके ही नेताओं को उठाना पड़ा है.
कांग्रेस पर हमलावर नक्सली
साल 2013 में सुकमा ज़िले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के क़ाफ़िले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.
इसके अलावा भी कांग्रेस को लेकर माओवादियों द्वारा समय-समय पर जो बयान जारी किये जाते रहे हैं उनमें सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा जाता रहा है.
माओवादी कांग्रेस को भाजपा से भी बड़ा दुश्मन इसलिए मानते आये हैं क्योंकि वो पी. चिदंबरम ही थे जिन्होंने गृहमंत्री रहते हुए सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान 'आपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया था.
माओवादी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान से भी ख़फ़ा बताए जाते हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि "माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."
इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों को तैनात किया गया था. इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर कई फ़र्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे. नतीजा, चिदंबरम और सोनिया गाँधी के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम माओवादियों की 'हिट-लिस्ट' में शामिल हो गए.
इतना ही नहीं, माओवादियों ने पर्चे जारी करके खुलेआम कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासी बहुल इलाकों में खनिज संपदाओं की लूट मचा रखी है.
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