सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में कुछ ऐसी सीटें रही हैं जहां दिग्गज प्रत्याशियों की जीत का अंतर बहुत ही कम रहा.
उत्तर प्रदेश के नतीजों पर ग़ौर करें तो ऐसी 9 सीटें रही हैं जहां हार जीत का अंतर 20 हज़ार वोटों से कम रहा.
क़रीब चार सीटें ऐसी रही हैं जहां 10 हज़ार से भी कम वोटों से प्रत्याशियों की जीत हुई है.
सबसे कम अंतर मछलीशहर में रहा जहां बीजेपी के भोलानाथ ने बसपा के त्रिभुवन राम को 181 वोटों से हराया.
इस चुनाव में कुछ ऐसी सीटें भी रही हैं जहां से दिग्गज नेताओं की हार जीत का अंतर बहुत कम रहा है जिनमें बीजेपी की नेता मेनका गांधी प्रमुख हैं.
सुल्तानपुर से उन्होंने प्रतिद्वंद्वी बसपा के चंद्रभद्र सिंह को 14,526 वोटों से हराया. यहां कांग्रेस के उम्मीदवार संजय सिंह को 41,681 वोट मिले.
महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी को भी हार का मुंह देखना पड़ा है.
अजित सिंह को बीजेपी के संजीव कुमार बाल्यान ने 6,526 वोटों से हराया जबकि बागपत से जयंत चौधरी को बीजेपी के सत्यपाल सिंह से 23,502 वोटों से मात दी.
मुजफ़्फ़रनगर में अकेले नोटा पर 5,110 वोट पड़े जबकि चुनाव में खड़े चार निर्दलियों को 13,620 वोट मिले.
बागपत में भी नोटा पर 5041 वोट पड़े और दो निर्दलियों को 3,860 वोट मिले.
सबसे उलटफेर और चौंकाने वाले नतीजे अमेठी और कन्नौज के रहे. अमेठी से स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराया जबकि कन्नौज में सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव को बीजेपी के सुब्रत पाठक के हाथों 12,353 वोटों से हार का सामना करना पड़ा.
अन्य दिग्गजों में सबसे चर्चित हार रही बीजेपी के मुखर नेता संबित पात्रा की जो ओडिशा के पुरी से मैदान में थे.
कड़े मुकाबले में बीजेडी की उम्मीदवार पिनाकी मिश्रा ने उन्हें 11,714 वोटों से हराया. पिनाकी मिश्रा को 5,38,321 जबकि संबित पात्रा को 5,26,607 वोट मिले.
बिहार की जहानाबाद सीट पर भी प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर रही. यहां से जदयू के चंद्रेश्वर प्रसाद ने राजद के सुरेंद्र प्रसाद यादव को 1751 वोटों से हराया.
यहां नोटा पर ही अकेले 27,683 वोट पड़े जबकि सीपीआई-एमएल की कुंती देवी को 26,325 वोट मिले.
बिहार के राजद नीत गठबंधन ने सीपीआईएमएल (लिबरेशन) के लिए आरा की एक सीट छोड़ी थी, जहां से इसके उम्मीदवार राजू यादव केंद्रीय राज्य मंत्री आरके सिंह से 1,47,285 वोटों से हार गए.
आरके सिंह को यहां से 5,66,480 वोट तो राजू यादव को 4,19,195 वोट मिले.
सीपीआईएमएल (लिबरेशन) ने आरा के बदले पाटलिपुत्र की सीट राजद उम्मीदवार के लिए छोड़ी थी.
बिहार की इस चर्चित सीट से राजद के संस्थापक लालू यादव की बेटी मीसा भारती मैदान में थीं, जिन्हें बीजेपी के राम कृपाल यादव ने 39,321 वोटों से हराया. वोट प्रतिशत देखें तो मीसा भारती को 43.63 जबकि राम कृपाल यादव को 47.28 प्रतिशत वोट मिले.
बहुचर्चित पटना साहिब सीट पर चुनावों के बाद बीजेपी से कांग्रेस में आए अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा को बीजेपी के केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के हाथों 2,84,657 वोटों से हार का सामना करना पड़ा.
रविशंकर प्रसाद को 6,07,506 वोट जबकि शत्रुघ्न सिन्हा को 3,22,849 वोट मिले.
इन चुनावों में बिहार की बेगूसराय सीट, कन्हैया की वजह से बहुत चर्चित रही. यहां से मोदी सरकार में मंत्री और अपने बयानों से विवादों में गिरिराज सिंह 4,22,217 वोटों के अंतर से कन्हैया को हराया.
उपेंद्र कुश्वाहा और जीतनराम मांझी महागठबंधन में शामिल होने के बावजूद जीत दर्ज नहीं कर पाए.
Friday, May 24, 2019
Wednesday, May 8, 2019
लोकसभा चुनाव 2019: मोदी से क्यों इतने नाराज़ हैं पूर्व फ़ौजी?
लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवाद, सेना और सीमा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है और भारतीय जनता पार्टी मुखर होकर इन मुद्दों पर वोट भी मांग रही है, इस बीच हम पहुंचे हरियाणा के बिशान गांव जहां लगभग हर घर का कोई ना कोई सदस्य भारतीय सेना में काम कर चुका है या कर रहा है.
पूर्व आर्मी चीफ़ दलबीर सिंह सुहाग भी इसी गांव से हैं. लगभग ढाई हज़ार की आबादी वाले इस गांव में फ़िलहाल 89 लोग रैंक अफ़सर हैं. सैकड़ों लोग सेना में काम कर रहे हैं. ये गांव रोहतक लोकसभा क्षेत्र में आता है.
गांव की चौपाल में हम पहुंचे तो थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि वहां कांग्रेस नेता और रोहतक संसदीय सीट से उम्मीदवार दीपेन्द्र हुड्डा के पोस्टर लगे थे और गांव के लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे.
वहां तैयारियों में लगे थे सेना से रिटायर्ड सैनिक. देश में सेना को लेकर जो माहौल है, उससे अलग वे एक-एक कर अपनी समस्याएं बताने लगे.
रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र सुहाग 32 साल थल सेना की सर्विस में रहे. उनका कहना है कि वो नरेंद्र मोदी से बस इतनी विनती कर रहे हैं कि वो सच बोलें और देश को बेवक़ूफ़ ना बनाएं. उन्होंने वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू तो किया लेकिन इससे सिर्फ़ बड़ी रैंक वाले अफ़सरों को ही फ़ायदा हुआ.
वो कहते हैं, "एक जूनियर कमीशन ऑफ़िसर यानी जेसीओ की OROP में 298 रुपए से लेकर 900 रुपए की बढ़ोतरी हुई और वहीं अधिकारियों की पेंशन में 70,000 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई."
वो एक और बात कहते हैं कि अब भी ये वन रैंक वन पेंशन नहीं, क्योंकि ये सिर्फ़ एक बार की बढ़ोतरी है. जब दोबारा तनख़्वाह बढ़ेगी तो पेंशन उस तरह से नहीं बढ़ेगी.
"हम ये नहीं कहते कि सबकी सैलेरी समान होनी चाहिए. जो अफ़सर है, ज़्यादा पढ़ा लिखा है, उसकी ज़्यादा होगी ही लेकिन कई ऐसे भत्ते हैं जिनमें अंतर नहीं रखना चाहिए."
वो उदाहरण के तौर पर बताते हैं कि जैसे जान जोखिम भत्ता (मिलिट्री सर्विस पे) जो कि फ़ील्ड पर रहने वालों को मिलता है. लेकिन 'जो अफ़सर दफ़्तर में बैठा है, उसे ये भत्ता ज़्यादा मिलता है और जो फ़्रंट पर है, जिसकी जान सबसे पहले जोखिम में है, उसे कम मिलता है.'
नायक ईश्वर सिंह अहलावत ने 17 साल फ़ौज में नौकरी की है. उन्होंने बताया कि तेज बहादुर ने जो सवाल उठाए थे, वैसा अक्सर होता है.
"हम ख़ुद फ़ौज में रह कर आए हैं. ये दरअसल फ़ौज में कुछ अफ़सरों के भ्रष्टाचार की वजह से होता है. जैसे अफ़सर ने किसी फल का ठेका दिया ठेकेदार को, ठेकेदार उससे सस्ता कोई फल सप्लाई करता है और अफ़सर इस तरह भ्रष्टाचार करता है."
सेना में भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व सैनिक कपिल सेना के बड़े अधिकारियों को ज़िम्मेदार मानते हैं.
"हथियारों की दलाली हो, आदर्श हाउसिंग घोटाला हो, तार फ़ेन्सिंग का मामला हो, उसमें हमारी सेना के अधिकारियों के तार जुड़े हुए हैं."
"इसके अलावा महिला अफ़सरों के साथ छेड़छाड़. देश की सुरक्षा करने वाली सेना अपनी महिला अफ़सरों की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं. ये सब रिपोर्ट जाती हैं सरकार के पास. कमेटी बैठती है संसद भवन के नीचे और ये सब फ़ाइलों में ही गुम हो जाती हैं."
नायक जयपाल 17 साल सेना में रहे हैं और वे सवाल उठाते हैं कि अगर अफ़सर शारीरिक तौर पर अक्षम हो जाए, उसके हाथ-पैर ना रहें तो अलग पेंशन है और एक सिपाही डिसेबल हो जाए तो अलग पेंशन है.
"यहां तो अंगों की भी बोली लग रही है तो फिर ये कैसा न्याय है"
सबसे ज़्यादा जिस बात से वो ख़फ़ा नज़र आए, वो है सेना में सहायकों की स्थिति का ना सुधरना. उन्होंने बताया कि सहायक का काम अपने अफ़सर की फ़ील्ड पर मदद करना है ना कि उनके पारिवारिक काम करना. लेकिन अच्छी रिपोर्ट के नाम पर सहायकों का शोषण किया जाता है.
"हम अपनी सेना को अमेरिका इसराइल की सेना की तरह देखना चाहते हैं ना कि उनके हाथ में झाड़ू और जूते."
कैप्टन दल सिंह 31 साल की सर्विस से रिटायर हुए हैं. उनका कहना है कि आज से 5 साल पहले ये सवाल ही नहीं उठता था कि फ़ौज किस पार्टी के साथ है.
"फ़ौज को अपना काम करना चाहिए. अगर फ़ौज राजनीति में आ जाएगी तो फ़ौज एकदम बेकार ही हो जाएगी"
"लोग भूल गए कि पुलवामा में 40 लोग सीआरपीएफ के शहीद हुए हैं. टीवी में दिखा दिया कि शहीद हो गए लेकिन उनको शहीद का दर्जा नहीं है. उन्हें आर्मी के लोगों जैसी सुविधाएं नहीं हैं."
कांग्रेस नेता को समर्थन क्यों
इस गांव में पहले इंडियन नेशनल लोकदल को भी काफ़ी वोट मिलते रहे हैं. इस बार में उन्हें कुछ वोट मिलेंगे. इसके अलावा बीजेपी के समर्थक भी हैं. लेकिन हम जिनसे मिले ये सभी पूर्व सैनिक हरियाणा कांग्रेस के नेता और रोहतक से सांसद रहे दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक थे. जब उनसे पूछा कि दस साल तो कांग्रेस की सरकार थी तो उन्होंने क्यों नहीं OROP लागू किया?
इसका जवाब मिलता है कि कांग्रेस ने भी दो बार दिया है. एक बार 1988 में उन्होंने सिर्फ़ 500 करोड़ ही दिया था और दीपेन्द्र हुड्डा का साथ इस बार इसलिए क्योंकि उन्होंने दो बार उनके मामले को संसद में उठाया.
साथ ही कांग्रेस के मैनिफ़ेस्टो के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर में लागू आफस्पा (AFSPA) पर दोबारा विचार किया जाएगा.
इसको लेकर किए सवाल पर पर कैप्टन राजेंद्र सुहाग जवाब देते हैं, "कांग्रेस ने जो AFSPA पर विचार करने की, उसे हटाने की बात की है, हम उसके विरोध में हैं. हमने कांग्रेस को भी कहा है कि आप ये ग़लत कर रहे हैं और हम आपका साथ इसमें नहीं दे सकेंगे."
पूर्व आर्मी चीफ़ दलबीर सिंह सुहाग भी इसी गांव से हैं. लगभग ढाई हज़ार की आबादी वाले इस गांव में फ़िलहाल 89 लोग रैंक अफ़सर हैं. सैकड़ों लोग सेना में काम कर रहे हैं. ये गांव रोहतक लोकसभा क्षेत्र में आता है.
गांव की चौपाल में हम पहुंचे तो थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि वहां कांग्रेस नेता और रोहतक संसदीय सीट से उम्मीदवार दीपेन्द्र हुड्डा के पोस्टर लगे थे और गांव के लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे.
वहां तैयारियों में लगे थे सेना से रिटायर्ड सैनिक. देश में सेना को लेकर जो माहौल है, उससे अलग वे एक-एक कर अपनी समस्याएं बताने लगे.
रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र सुहाग 32 साल थल सेना की सर्विस में रहे. उनका कहना है कि वो नरेंद्र मोदी से बस इतनी विनती कर रहे हैं कि वो सच बोलें और देश को बेवक़ूफ़ ना बनाएं. उन्होंने वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू तो किया लेकिन इससे सिर्फ़ बड़ी रैंक वाले अफ़सरों को ही फ़ायदा हुआ.
वो कहते हैं, "एक जूनियर कमीशन ऑफ़िसर यानी जेसीओ की OROP में 298 रुपए से लेकर 900 रुपए की बढ़ोतरी हुई और वहीं अधिकारियों की पेंशन में 70,000 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई."
वो एक और बात कहते हैं कि अब भी ये वन रैंक वन पेंशन नहीं, क्योंकि ये सिर्फ़ एक बार की बढ़ोतरी है. जब दोबारा तनख़्वाह बढ़ेगी तो पेंशन उस तरह से नहीं बढ़ेगी.
"हम ये नहीं कहते कि सबकी सैलेरी समान होनी चाहिए. जो अफ़सर है, ज़्यादा पढ़ा लिखा है, उसकी ज़्यादा होगी ही लेकिन कई ऐसे भत्ते हैं जिनमें अंतर नहीं रखना चाहिए."
वो उदाहरण के तौर पर बताते हैं कि जैसे जान जोखिम भत्ता (मिलिट्री सर्विस पे) जो कि फ़ील्ड पर रहने वालों को मिलता है. लेकिन 'जो अफ़सर दफ़्तर में बैठा है, उसे ये भत्ता ज़्यादा मिलता है और जो फ़्रंट पर है, जिसकी जान सबसे पहले जोखिम में है, उसे कम मिलता है.'
नायक ईश्वर सिंह अहलावत ने 17 साल फ़ौज में नौकरी की है. उन्होंने बताया कि तेज बहादुर ने जो सवाल उठाए थे, वैसा अक्सर होता है.
"हम ख़ुद फ़ौज में रह कर आए हैं. ये दरअसल फ़ौज में कुछ अफ़सरों के भ्रष्टाचार की वजह से होता है. जैसे अफ़सर ने किसी फल का ठेका दिया ठेकेदार को, ठेकेदार उससे सस्ता कोई फल सप्लाई करता है और अफ़सर इस तरह भ्रष्टाचार करता है."
सेना में भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व सैनिक कपिल सेना के बड़े अधिकारियों को ज़िम्मेदार मानते हैं.
"हथियारों की दलाली हो, आदर्श हाउसिंग घोटाला हो, तार फ़ेन्सिंग का मामला हो, उसमें हमारी सेना के अधिकारियों के तार जुड़े हुए हैं."
"इसके अलावा महिला अफ़सरों के साथ छेड़छाड़. देश की सुरक्षा करने वाली सेना अपनी महिला अफ़सरों की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं. ये सब रिपोर्ट जाती हैं सरकार के पास. कमेटी बैठती है संसद भवन के नीचे और ये सब फ़ाइलों में ही गुम हो जाती हैं."
नायक जयपाल 17 साल सेना में रहे हैं और वे सवाल उठाते हैं कि अगर अफ़सर शारीरिक तौर पर अक्षम हो जाए, उसके हाथ-पैर ना रहें तो अलग पेंशन है और एक सिपाही डिसेबल हो जाए तो अलग पेंशन है.
"यहां तो अंगों की भी बोली लग रही है तो फिर ये कैसा न्याय है"
सबसे ज़्यादा जिस बात से वो ख़फ़ा नज़र आए, वो है सेना में सहायकों की स्थिति का ना सुधरना. उन्होंने बताया कि सहायक का काम अपने अफ़सर की फ़ील्ड पर मदद करना है ना कि उनके पारिवारिक काम करना. लेकिन अच्छी रिपोर्ट के नाम पर सहायकों का शोषण किया जाता है.
"हम अपनी सेना को अमेरिका इसराइल की सेना की तरह देखना चाहते हैं ना कि उनके हाथ में झाड़ू और जूते."
कैप्टन दल सिंह 31 साल की सर्विस से रिटायर हुए हैं. उनका कहना है कि आज से 5 साल पहले ये सवाल ही नहीं उठता था कि फ़ौज किस पार्टी के साथ है.
"फ़ौज को अपना काम करना चाहिए. अगर फ़ौज राजनीति में आ जाएगी तो फ़ौज एकदम बेकार ही हो जाएगी"
"लोग भूल गए कि पुलवामा में 40 लोग सीआरपीएफ के शहीद हुए हैं. टीवी में दिखा दिया कि शहीद हो गए लेकिन उनको शहीद का दर्जा नहीं है. उन्हें आर्मी के लोगों जैसी सुविधाएं नहीं हैं."
कांग्रेस नेता को समर्थन क्यों
इस गांव में पहले इंडियन नेशनल लोकदल को भी काफ़ी वोट मिलते रहे हैं. इस बार में उन्हें कुछ वोट मिलेंगे. इसके अलावा बीजेपी के समर्थक भी हैं. लेकिन हम जिनसे मिले ये सभी पूर्व सैनिक हरियाणा कांग्रेस के नेता और रोहतक से सांसद रहे दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक थे. जब उनसे पूछा कि दस साल तो कांग्रेस की सरकार थी तो उन्होंने क्यों नहीं OROP लागू किया?
इसका जवाब मिलता है कि कांग्रेस ने भी दो बार दिया है. एक बार 1988 में उन्होंने सिर्फ़ 500 करोड़ ही दिया था और दीपेन्द्र हुड्डा का साथ इस बार इसलिए क्योंकि उन्होंने दो बार उनके मामले को संसद में उठाया.
साथ ही कांग्रेस के मैनिफ़ेस्टो के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर में लागू आफस्पा (AFSPA) पर दोबारा विचार किया जाएगा.
इसको लेकर किए सवाल पर पर कैप्टन राजेंद्र सुहाग जवाब देते हैं, "कांग्रेस ने जो AFSPA पर विचार करने की, उसे हटाने की बात की है, हम उसके विरोध में हैं. हमने कांग्रेस को भी कहा है कि आप ये ग़लत कर रहे हैं और हम आपका साथ इसमें नहीं दे सकेंगे."
Thursday, May 2, 2019
ब्रिटेन : ख्वावे लीक मामले में रक्षा मंत्री विलियमसन बर्खास्त
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री गेविन विलयमसन को बर्खास्त कर दिया गया है. उन पर ये कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की उच्च स्तरीय बैठक की जानकारी लीक होने के मामले में हुई जांच को लेकर की गई है. वो साल 2017 से रक्षा मंत्री थे.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने 'उनकी क्षमताओं में भरोसा गंवा दिया है' और पेनी मोरडंट उनकी जगह लेंगी.
प्रधानमंत्री मे ने कहा है कि 23 अप्रैल की मीटिंग की जानकारी लीक होना 'बहुत गंभीर मामला है और ये एक निराश करने वाली बात है.'
मीटिंग की जानकारी लीक होने के मामले की जांच ब्रिटेन में 5 जी नेटवर्क तैयार करने में ख्वावे लिमिटेड को भूमिका देने की योजना की रिपोर्ट आने के बाद की गई थी.
प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की बुधवार को विलियमसन के साथ मीटिंग हुई थी. इस दौरान प्रधानमंत्री मे ने कहा था कि उनके पास सचूनाएं हैं कि वो (विलयमसन) अनाधिकृत तौर पर जानकारी देने के लिए ज़िम्मेदार हैं.
विलियमसन की बर्खास्तगी की पुष्टि करने वाले पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा, " घटनाओं का कोई और विश्वसनीय वर्णन नहीं है, जहां से इस लीक की पहचान होती हो."
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विलियमसन ने कहा है कि उन्हें 'भरोसा' है कि एक 'व्यापक और विधिवत जांच' उन्हें 'दोषमुक्त' साबित कर सकती थी.
उन्होंने कहा, "मैं सराहना करता हूं कि आपने मेरे सामने इस्तीफा देने का विकल्प रखा लेकिन इस्तीफा देने का मतलब ये मान लेना होता कि मैं, मेरे नौकरशाह, मेरे सैन्य सलाहकार या फिर मेरा स्टाफ ज़िम्मेदार हैं, जबकि मामला ऐसा नहीं है."
बीबीसी की राजनीतिक संपादक लॉरा कुन्सबर्ग का कहना है कि विलियमसन इस बात पर टिके हुए हैं कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है.
उनका कहना है कि सिक्योरिटी काउंसिल से कोई जानकारी लीक होना 'असमान्य' है और 'प्रधानमंत्री को लगा कि उन्हें इस मामले में कार्रवाई करनी होगी'.
लेकिन सुरक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का कहना है कि बीबीसी को जानकारी मिली है कि जानकारी लीक होने को लेकर हुई जांच के दौरान विलियमसन को लेकर ' फिक्र के एक से ज़्यादा मुद्दे मिले' और ये सिर्फ ख्वावे से जुड़ी बातचीत का ही मामला नहीं था.
ख्वावे को लेकर हुई फ़ैसले की जानकारी डेली टेलीग्राफ में आने के बाद एनएससी से जानकारी लीक होने की जांच हुई.
एनएससी में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं और प्रधानमंत्री की अगुवाई में इसकी साप्ताहिक बैठक होती है. दूसरे मंत्रियों और अधिकारियों को ज़रूरत के मुताबिक इसमें बुलाया जाता है.
अभी तक ख्वावे की भूमिका के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
वहीं ख्वावे ने जासूसी के किसी तरह के ख़तरे से इनकार किया है. कंपनी ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसे चीन की सरकार नियंत्रित करती है.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने 'उनकी क्षमताओं में भरोसा गंवा दिया है' और पेनी मोरडंट उनकी जगह लेंगी.
प्रधानमंत्री मे ने कहा है कि 23 अप्रैल की मीटिंग की जानकारी लीक होना 'बहुत गंभीर मामला है और ये एक निराश करने वाली बात है.'
मीटिंग की जानकारी लीक होने के मामले की जांच ब्रिटेन में 5 जी नेटवर्क तैयार करने में ख्वावे लिमिटेड को भूमिका देने की योजना की रिपोर्ट आने के बाद की गई थी.
प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की बुधवार को विलियमसन के साथ मीटिंग हुई थी. इस दौरान प्रधानमंत्री मे ने कहा था कि उनके पास सचूनाएं हैं कि वो (विलयमसन) अनाधिकृत तौर पर जानकारी देने के लिए ज़िम्मेदार हैं.
विलियमसन की बर्खास्तगी की पुष्टि करने वाले पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा, " घटनाओं का कोई और विश्वसनीय वर्णन नहीं है, जहां से इस लीक की पहचान होती हो."
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विलियमसन ने कहा है कि उन्हें 'भरोसा' है कि एक 'व्यापक और विधिवत जांच' उन्हें 'दोषमुक्त' साबित कर सकती थी.
उन्होंने कहा, "मैं सराहना करता हूं कि आपने मेरे सामने इस्तीफा देने का विकल्प रखा लेकिन इस्तीफा देने का मतलब ये मान लेना होता कि मैं, मेरे नौकरशाह, मेरे सैन्य सलाहकार या फिर मेरा स्टाफ ज़िम्मेदार हैं, जबकि मामला ऐसा नहीं है."
बीबीसी की राजनीतिक संपादक लॉरा कुन्सबर्ग का कहना है कि विलियमसन इस बात पर टिके हुए हैं कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है.
उनका कहना है कि सिक्योरिटी काउंसिल से कोई जानकारी लीक होना 'असमान्य' है और 'प्रधानमंत्री को लगा कि उन्हें इस मामले में कार्रवाई करनी होगी'.
लेकिन सुरक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का कहना है कि बीबीसी को जानकारी मिली है कि जानकारी लीक होने को लेकर हुई जांच के दौरान विलियमसन को लेकर ' फिक्र के एक से ज़्यादा मुद्दे मिले' और ये सिर्फ ख्वावे से जुड़ी बातचीत का ही मामला नहीं था.
ख्वावे को लेकर हुई फ़ैसले की जानकारी डेली टेलीग्राफ में आने के बाद एनएससी से जानकारी लीक होने की जांच हुई.
एनएससी में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं और प्रधानमंत्री की अगुवाई में इसकी साप्ताहिक बैठक होती है. दूसरे मंत्रियों और अधिकारियों को ज़रूरत के मुताबिक इसमें बुलाया जाता है.
अभी तक ख्वावे की भूमिका के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
वहीं ख्वावे ने जासूसी के किसी तरह के ख़तरे से इनकार किया है. कंपनी ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसे चीन की सरकार नियंत्रित करती है.
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